राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 23 अगस्त 2005 को शुरू की गई Palanhar Yojana 2025 का उद्देश्य संस्थागत अनाथ देखभाल के स्थान पर परिवार-आधारित मॉडल अपनाना है। शुरुआत में यह योजना केवल अनुसूचित जाति के अनाथ बच्चों तक सीमित थी, लेकिन बाद में इसमें विधवाओं, एचआईवी/एड्स से पीड़ित माता-पिता, विकलांगों और अन्य कमजोर वर्गों के बच्चों को भी शामिल किया गया।
इस योजना के तहत अनाथ बच्चों को ₹1,500-₹2,500 मासिक और अन्य बच्चों को ₹500-₹1,000 मासिक सहायता प्रदान की जाती है, साथ ही कपड़ों और शैक्षिक सामग्री के लिए वार्षिक भत्ता भी दिया जाता है। वर्तमान में, इससे 5 लाख से ज़्यादा बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने इसकी नवीनीकरण प्रक्रिया को और भी सरल बना दिया है।
पालनहार योजना की शुरुआत और इतिहास
Palanhar Yojana राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 23 अगस्त 2005 को लॉन्च की गई थी। ‘पालनहार’ शब्द राजस्थानी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘पालन करने वाला’। इस योजना का मुख्य विचार यह था कि अनाथ या असहाय बच्चों को अनाथालयों में संस्थागत रूप से रखने के बजाय, उनके परिवार या निकट संबंधियों के पास ही रखा जाए, जहां वे पारिवारिक वातावरण में बड़ा हो सकें। यह भारत की पहली ऐसी योजना है जो परिवार-आधारित फॉस्टर केयर पर जोर देती है।
शुरुआत में यह योजना केवल अनुसूचित जाति के अनाथ बच्चों के लिए थी, लेकिन जल्द ही इसे सभी जातियों और वर्गों के बच्चों के लिए विस्तारित कर दिया गया। 2018-2020 के आसपास इसमें कई संशोधन हुए, जैसे लाभ राशि में वृद्धि और पात्रता श्रेणियों का विस्तार। 2022 में जारी दिशा-निर्देशों में योजना को और मजबूत बनाया गया, जिसमें विशेष रूप से लड़कियों और विकलांग बच्चों पर फोकस किया गया। 2025 तक, योजना के तहत लगभग 5 लाख लाभार्थी हैं, और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने इसे और प्रभावी बनाने के लिए रिन्यूअल प्रक्रिया को सरल बनाया है। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करती है।
योजना की पृष्ठभूमि में राजस्थान की सामाजिक स्थिति महत्वपूर्ण है। राज्य में गरीबी, सूखा और प्रवासन के कारण कई बच्चे माता-पिता से वंचित हो जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में अनाथ बच्चों की संख्या लाखों में है, और Palanhar Yojana ने इनमें से कई को मुख्यधारा में लाने का काम किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, यह योजना यूनिसेफ जैसे संगठनों की ‘फैमिली-बेस्ड केयर’ नीतियों से प्रेरित है, लेकिन स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अनुकूलित है। पिछले 20 वर्षों में, योजना ने न केवल बच्चों के जीवन बदले, बल्कि समाज में जागरूकता भी फैलाई कि अनाथालय अंतिम विकल्प होना चाहिए, परिवार पहला।
योजना के उद्देश्य
Palanhar Yojana के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- परिवार-आधारित देखभाल सुनिश्चित करना: बच्चों को अनाथालयों से दूर रखकर उनके निकट संबंधियों या इच्छुक व्यक्तियों के पास पालना, ताकि वे भावनात्मक रूप से मजबूत हों।
- आर्थिक सहायता प्रदान करना: पालनहार (गार्जियन) को मासिक अनुदान देकर बच्चों की शिक्षा, भोजन, कपड़े और स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करना।
- शिक्षा और विकास को बढ़ावा देना: 2-6 वर्ष के बच्चों को आंगनवाड़ी में और 6 वर्ष से ऊपर के बच्चों को स्कूल में नामांकन अनिवार्य करना।
- सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना: विशेष रूप से लड़कियों, विकलांगों और अल्पसंख्यक बच्चों को प्राथमिकता देकर लिंग और जाति आधारित असमानता कम करना।
- बच्चों को मुख्यधारा में लाना: 18 वर्ष तक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, ताकि वे समाज में योगदान दे सकें।
ये उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) से जुड़े हैं, खासकर गोल 1 (गरीबी उन्मूलन) और गोल 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) से। योजना न केवल बच्चों को बचाती है, बल्कि पूरे परिवार को मजबूत बनाती है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | पालनहार योजना, राजस्थान |
| शुरुआत | 8 फरवरी 2005 |
| उद्देश्य | अनाथ और कमजोर बच्चों की परवरिश और शिक्षा के लिए परिवार में सहायता प्रदान करना। |
| विभाग | सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग, राजस्थान |
| लाभार्थी | अनाथ बच्चे, माता-पिता के साथ विशिष्ट परिस्थितियों (एचआईवी/एड्स, कुष्ठ रोग, जेल, विधवा, तलाकशुदा, विशेष रूप से अक्षम) वाले बच्चे। |
| पात्रता | – राजस्थान में 3 साल निवास। – पालनहार की आय ≤ ₹1.20 लाख/वर्ष। – बच्चे की उम्र 0–18 वर्ष। |
| वित्तीय सहायता | – 0–6 वर्ष: ₹1,500/माह। – 6–18 वर्ष: ₹2,500/माह (स्कूल में नामांकन अनिवार्य)। – अतिरिक्त: ₹2,000/वर्ष (कपड़े, जूते आदि के लिए)। |
| आवेदन | – ऑनलाइन: https://sje.rajasthan.gov.in/ या SSO पोर्टल। – ऑफलाइन: जिला कार्यालय, पंचायत समिति, या ई-मित्र केंद्र। |
| दस्तावेज | आधार, जन आधार, आय प्रमाण, स्कूल/आंगनवाड़ी प्रमाण, माता-पिता की स्थिति के दस्तावेज। |
| हेल्पलाइन | 0141-2226620, 1800-180-6127 |
| प्रभाव | 4 लाख से अधिक बच्चों को लाभ, स्कूल छोड़ने की दर में कमी। |
नोट: नवीनतम जानकारी के लिए वेबसाइट देखें या हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
पात्रता मानदंड
Palanhar Yojana की पात्रता विभिन्न श्रेणियों में बांटी गई है, जो 2022 के संशोधित नियमों पर आधारित है। मुख्य श्रेणियां निम्न हैं:
- अनाथ बच्चे: माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी हो।
- माता-पिता को सजा प्राप्त बच्चे: माता-पिता को आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा हो।
- विधवा माता के बच्चे: निराश्रित पेंशन प्राप्त विधवा की अधिकतम 3 संतानें (अन्य पेंशन न मिल रही हो)।
- पुनर्विवाहित विधवा के बच्चे: विधवा माता के पुनर्विवाह के बाद की संतानें।
- एचआईवी/एड्स प्रभावित माता-पिता के बच्चे।
- कुष्ठ रोग प्रभावित माता-पिता के बच्चे।
- सिलिकोसिस प्रभावित माता-पिता के बच्चे।
- परित्यक्त या तलाकशुदा माता के बच्चे: अधिकतम 3 संतानें।
- विकलांग माता-पिता के बच्चे: विकलांगता 40% से अधिक हो।
- अन्य विशेष श्रेणियां: जैसे विशेष आवश्यकता वाले बच्चे या जेल में बंद माता-पिता के बच्चे।
सामान्य शर्तें:
- बच्चे की आयु 0-18 वर्ष (12वीं तक पढ़ाई जारी हो तो 19 वर्ष तक विस्तार)।
- पालनहार का वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम।
- पालनहार राजस्थान का निवासी हो (कम से कम 3 वर्ष से)।
- बच्चे का आंगनवाड़ी/स्कूल नामांकन अनिवार्य।
- पुनर्विवाहित विधवा के बच्चे अब पात्र हैं, लेकिन कुछ श्रेणियों में अपवाद हैं।
ये मानदंड योजना को समावेशी बनाते हैं, और लड़की बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है। यदि कोई बच्चा इनमें फिट बैठता है, तो वे आसानी से लाभ ले सकते हैं।
लाभ और सहायता राशि
योजना के तहत वित्तीय लाभ श्रेणी और आयु के आधार पर दिए जाते हैं:
- अनाथ श्रेणी:
- 0-6 वर्ष: ₹1500 प्रति माह।
- 6-18 वर्ष (स्कूल में नामांकन पर): ₹2500 प्रति माह।
- अन्य श्रेणियां (जैसे विधवा, एड्स प्रभावित आदि):
- 0-6 वर्ष: ₹500 प्रति माह।
- 6-18 वर्ष: ₹1000 प्रति माह।
इसके अलावा:
- वार्षिक ₹2000 की अतिरिक्त राशि कपड़े, जूते, स्वेटर, किताबें आदि के लिए (विधवा श्रेणी को छोड़कर)।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं: आंगनवाड़ी/स्कूल नामांकन, मुफ्त चिकित्सा जांच।
- 2025 में, सरकार ने DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से राशि सीधे बैंक खाते में डालने की प्रक्रिया तेज की है।
ये लाभ बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी करते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनाते हैं। उदाहरण के लिए, एक अनाथ बच्चे को 18 वर्ष तक कुल सहायता लाखों रुपये तक पहुंच सकती है, जो शिक्षा में निवेश के रूप में काम करती है।
आवेदन प्रक्रिया
Palanhar Yojana के लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है:
ऑनलाइन आवेदन:
- आधिकारिक वेबसाइट https://sje.rajasthan.gov.in या SSO पोर्टल (sso.rajasthan.gov.in) पर जाएं।
- जन आधार आईडी से लॉगिन करें या नया रजिस्ट्रेशन करें।
- Palanhar Yojana का फॉर्म चुनें, विवरण भरें (बच्चे का नाम, श्रेणी, आयु आदि)।
- आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- सबमिट करें; आवेदन आईडी प्राप्त होगी।
- ई-मित्रा केंद्र पर भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
ऑफलाइन आवेदन:
- फॉर्म डाउनलोड करें या ई-मित्रा/जिला अधिकारी कार्यालय से प्राप्त करें।
- फॉर्म भरें, दस्तावेज संलग्न करें।
- ग्रामीण क्षेत्र में विकास अधिकारी या शहरी क्षेत्र में जिला अधिकारी को जमा करें।
- सत्यापन के बाद स्वीकृति मिलेगी।
सत्यापन प्रक्रिया: आवेदन के 30 दिनों में जांच होती है, जिसमें स्थानीय अधिकारी घर जाकर जांच करते हैं। 2025 में रिन्यूअल अनिवार्य है, अन्यथा लाभ रद्द हो सकता है।
आवश्यक दस्तावेज
आवेदन के लिए निम्न दस्तावेज जरूरी हैं:
- बच्चे का जन आधार/आधार कार्ड।
- माता-पिता की मृत्यु प्रमाण पत्र (यदि लागू)।
- सजा की कॉपी (मृत्युदंड/आजीवन कारावास के लिए)।
- विधवा पेंशन ऑर्डर की कॉपी।
- एचआईवी/एड्स/कुष्ठ/विकलांगता प्रमाण पत्र (एआरटी सेंटर से)।
- आय प्रमाण पत्र (पालनहार का आय <1.20 लाख)।
- निवास प्रमाण पत्र (राशन कार्ड/मतदाता आईडी)।
- स्कूल/आंगनवाड़ी नामांकन प्रमाण।
- पालनहार का शपथ पत्र (बच्चे की जिम्मेदारी लेने का)।
- जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू)।
ये दस्तावेज सुनिश्चित करते हैं कि लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे।
भुगतान स्थिति की जांच और हेल्पलाइन
भुगतान स्थिति जांचने के लिए:
- https://sjmsnew.rajasthan.gov.in पर जाएं।
- पालनहार पेमेंट स्टेटस ऑप्शन चुनें।
- आवेदन आईडी, जन आधार नंबर और कैप्चा डालें।
- स्थिति दिखेगी।
हेल्पलाइन: 0141-2220194 या स्थानीय जिला कार्यालय। जन सूचना पोर्टल (jansoochna.rajasthan.gov.in) पर भी जानकारी उपलब्ध है।
योजना का प्रभाव और सफलता की कहानियां
Palanhar Yojana ने लाखों बच्चों के जीवन बदले हैं। 2025 में, 5 लाख से अधिक लाभार्थी हैं, और सरकार ने ₹87 करोड़ से अधिक वितरित किए हैं। उदयपुर में, योजना ने परिवार संरक्षण को मजबूत बनाया, जहां कई बच्चे अब स्कूल जा रहे हैं और उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
एक सफलता की कहानी: उदयपुर की एक विधवा मां की तीन बेटियां योजना से लाभान्वित हुईं। मासिक ₹1000 से वे स्कूल गईं और आज एक आईटी क्षेत्र में काम कर रही हैं। इसी तरह, बारमेर में एक अनाथ लड़की ने योजना की मदद से डॉक्टर बनने का सपना साकार किया। X पर हालिया पोस्ट्स में, उपयोगकर्ता योजना को ‘उम्मीद की किरण’ बता रहे हैं, जहां भजनलाल सरकार ने नई ऊर्जा दी है।
योजना का प्रभाव: ड्रॉपआउट दर कम हुई, लड़कियों की शिक्षा बढ़ी, और परिवार मजबूत हुए। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में भुगतान में देरी की शिकायतें हैं, लेकिन सरकार इसे सुधार रही है।
चुनौतियां और सुधार के सुझाव
योजना की चुनौतियां:
- दस्तावेज जमा में देरी और जागरूकता की कमी।
- ग्रामीण क्षेत्रों में सत्यापन प्रक्रिया धीमी।
- कभी-कभी भुगतान में विलंब, जैसा कि बारमेर के एक पोस्ट में उल्लेख है।
- आय प्रमाण पत्र प्राप्त करना मुश्किल।
सुझाव: डिजिटल ट्रैकिंग बढ़ाएं, जागरूकता कैंप लगाएं, और NGO से सहयोग लें। 2025 में, रिन्यूअल को ऑनलाइन बनाकर सुधार हो रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
2025 में, योजना को और विस्तारित करने की योजना है, जैसे लाभ राशि में वृद्धि और AI-आधारित सत्यापन। अन्य राज्यों जैसे बिहार की कन्या उत्थान योजना से तुलना में, पालनहार अधिक समावेशी है। भविष्य में, यह राष्ट्रीय मॉडल बन सकती है।
निष्कर्ष
Palanhar Yojana राजस्थान की मानवीय पहल है जो बच्चों को न केवल जीवित रखती है, बल्कि उन्हें जीने का तरीका सिखाती है। यदि आप पात्र हैं, तो आज ही आवेदन करें। यह योजना साबित करती है कि सरकार और समाज मिलकर चमत्कार कर सकते हैं। आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं



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