Bhavantar Bharpai Yojana Haryana : भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ किसानों की आर्थिक स्थिति काफी हद तक उनकी फसलों के सही दाम मिलने पर निर्भर करती है। अक्सर मंडी में सब्जियों और फलों के दाम काफी गिर जाते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने भावान्तर भरपाई योजना (Bhavantar Bharpai Yojna) शुरू की है। यह योजना किसानों को उनके उत्पादन का संरक्षण मूल्य (Protected Price) सुनिश्चित करती है और उन्हें नुकसान से बचाने में मदद करती है।
Bhavantar Bharpai Yojana का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों की आय समय पर और उचित रूप से बढ़े तथा उन्हें कृषि में विविधिकरण के लिए प्रोत्साहन मिले।
भावान्तर भरपाई योजना क्या है?
Bhavantar Bharpai Yojana एक ऐसी सरकारी योजना है, जिसके तहत यदि किसान अपनी फसल को मंडी में बेचते समय उन्हें सरकार द्वारा तय किए गए संरक्षित मूल्य (Protected Price) से कम दाम मिलता है, तो सरकार उस अंतर की भरपाई सीधी किसानों के खाते में करती है।
यह योजना मुख्य रूप से सब्जी और फल उत्पादकों के लिए बनाई गई है ताकि वे बाजार में कीमतों की अनिश्चितता से सुरक्षित रह सकें।
भावान्तर भरपाई योजना का उद्देश्य
Bhavantar Bharpai Yojana का उद्देश्य किसानों को केवल आर्थिक सहारा देना ही नहीं बल्कि उन्हें नई फसलों की खेती करने तथा मुनाफा बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है। मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
- किसानों को मंडी में कम भाव मिलने पर भरपाई देना।
- किसानों की आय को स्थिर और सुरक्षित बनाना।
- कृषि में विविधिकरण (Diversification) को बढ़ावा देना।
- सब्जी और फल उत्पादकों को जोखिममुक्त करना।
- किसानों में हतोत्साहन की स्थिति को रोकना।
योजना के अंतर्गत शामिल फसलें, संरक्षित मूल्य और निर्धारित उत्पादन
Bhavantar Bharpai Yojana के पहले चरण में केवल चार सब्जियों — टमाटर, प्याज, आलू और फूलगोभी — को शामिल किया गया था। बाद में इसे और व्यापक बनाकर अन्य फलों व सब्जियों को भी इसमें जोड़ा गया। नीचे दी गई तालिका में इन सब्जियों और फलों का संरक्षित मूल्य और निर्धारित उत्पादन प्रति एकड़ दिया गया है:
Bhavantar Bharpai Yojana के अंतर्गत संरक्षित मूल्य और उत्पादन (अपडेटेड टेबल)
| क्र.सं. | फसल का नाम | संरक्षित मूल्य (₹/क्विंटल) | निर्धारित उत्पादन (क्विंटल/एकड़) |
|---|---|---|---|
| 1 | आलू | 600 | 120 |
| 2 | प्याज | 650 | 100 |
| 3 | टमाटर | 500 | 140 |
| 4 | फूलगोभी | 750 | 100 |
| 5 | गाजर | 700 | 100 |
| 6 | मटर | 1100 | 50 |
| 7 | शिमला मिर्च | 900 | 80 |
| 8 | बैंगन | 500 | 110 |
| 9 | भिन्डी | 1050 | 70 |
| 10 | मिर्च | 950 | 70 |
| 11 | लौकी | 450 | 110 |
| 12 | करेला | 1350 | 40 |
| 13 | हल्दी | 1400 | 80 |
| 14 | पत्ता गोभी | 650 | 100 |
| 15 | लहसुन | 2300 | 50 |
| 16 | मूली | 450 | 100 |
| 17 | अमरूद | 1300 | 70 |
| 18 | आम | 1950 | 50 |
| 19 | किन्नू | 1100 | 104 |
| 20 | शहद (Honey) | 300–350 (अनुमानित) | 40–50 (अनुमानित) |
शहद (Honey) को शामिल करने का प्रभाव
- यह पहली बार है जब सरकार ने किसी पशुपालन/वैकल्पिक कृषि आधारित उत्पाद (मधुमक्खी पालन) को भावान्तर भरपाई योजना में जोड़ा है।
- किसानों को शहद का संरक्षित मूल्य निश्चित मिलने से उत्पादन का दायरा और व्यापक होगा।
- मधुमक्खी पालन से न केवल अतिरिक्त आय होगी बल्कि परागण (Pollination) के कारण खेतों की अन्य फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा।
- इससे किसानों का कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ग्रामीण उद्यमिता दोनों को मजबूती मिलेगी।
भावान्तर भरपाई योजना की मुख्य विशेषताएं
- किसानों की आय ₹48,000 से ₹56,000 प्रति एकड़ सुनिश्चित करना।
- मण्डी में कम भाव आने पर अंतर राशि सीधा किसान को देना।
- योजना के अंतर्गत पंजीकरण निःशुल्क है।
- लाभ सभी श्रेणी के किसानों को मिलेगा — चाहे वे भूमि मालिक हों, पट्टेदार हों या किराए पर खेती करने वाले।
- पारदर्शिता के लिए बिक्री का डेटा BBY ई-पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।
- भुगतान सीधे आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा।
पंजीकरण की प्रक्रिया
इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसान को समय पर पंजीकरण करवाना आवश्यक है।
पंजीकरण के प्रमुख बिंदु:
- पंजीकरण केवल निर्धारित अवधि में ही किया जा सकता है।
- किसान www.hsamb.gov.in वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
- पंजीकरण के दौरान उद्यान विभाग द्वारा किसानों के क्षेत्र का सत्यापन किया जाता है।
- यदि किसान सत्यापन से असंतुष्ट हो तो अपील का अधिकार है।
- पंजीकरण के लिए किसान CSC, ई-दिशा केंद्र, मार्केटिंग बोर्ड, इंटरनेट कियोस्क आदि का सहारा ले सकते हैं।
बिक्री अवधि और पंजीकरण कैलेंडर
हर फसल के लिए अलग-अलग पंजीकरण, सत्यापन और बिक्री की अवधि तय की गई है। उदाहरणस्वरूप,
- आलू का पंजीकरण 15 सितम्बर से 31 अक्टूबर तक होता है और बिक्री 1 दिसम्बर से 31 मार्च तक मान्य होती है।
- प्याज और टमाटर का पंजीकरण 15 दिसम्बर से 15 फरवरी के बीच होता है।
- आम और अमरूद जैसे फलों के लिए पंजीकरण मार्च से मई के बीच होता है।
इसलिए किसानों को अपनी फसल की पंजीकरण और बिक्री अवधि का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
प्रोत्साहन प्रक्रिया
- किसान को फसल केवल J-Form पर ही बेचनी होगी।
- बिक्री का विवरण संबंधित मार्केट कमेटी के कार्यालय से BBY पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
- यदि मंडी दाम संरक्षित मूल्य से कम है, तो अंतर राशि सीधे किसान के बैंक खाते में 15 दिन के भीतर जमा कर दी जाएगी।
- भुगतान पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी तरीके से किया जाता है।
योजना का महत्व
- किसानों को स्थायी आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
- फसलों का संरक्षण मूल्य तय होने से नुकसान की भरपाई।
- मंडियों में भाव गिरने पर भी किसानों का भरोसा बना रहता है।
- यह योजना कृषि क्षेत्र में स्थिरता और प्रोत्साहन लाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Bhavantar Bharpai Yojana का लाभ किसे मिलेगा?
Bhavantar Bharpai Yojanaका लाभ भूमि मालिक किसानों, पट्टेदारों और किराए पर खेती करने वालों को मिलेगा।
क्या पंजीकरण हर साल करना जरूरी है?
हाँ, योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को हर साल अपनी फसल और भूमि का पंजीकरण करना आवश्यक है।
भुगतान कब तक मिलता है?
फसल बिक्री और सत्यापन के बाद लगभग 15 दिन के अंदर भुगतान किसान के बैंक खाते में पहुंच जाता है।
क्या पंजीकरण शुल्क देना पड़ता है?
नहीं, पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क है।
यह योजना किन-किन फसलों पर लागू है?
यह योजना सब्जियों और फलों दोनों पर लागू है, जैसे आलू, प्याज, टमाटर, फूलगोभी, गाजर, मटर, आम, अमरूद और किन्नू आदि।
निष्कर्ष
भावान्तर भरपाई योजना (Bhavantar Bharpai Yojna) किसानों की सुरक्षा और आय वृद्धि के लिए एक क्रांतिकारी पहल है। यह न केवल किसानों को नुकसान से बचाती है, बल्कि उन्हें नई फसलों को उगाने और बाजार की अस्थिरता से सुरक्षित रहने में मदद करती है।
यदि समय पर पंजीकरण किया जाए और J-Form पर बिक्री की प्रक्रिया पूरी की जाए, तो किसान इस योजना का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं। आज के समय में जब मंडी भाव अचानक गिरते-बढ़ते हैं, यह योजना किसानों की आर्थिक ढाल बनकर उभर रही है।


